शुक्रवार 24 अप्रैल 2026 - 19:02
शहीद-ए-उम्मत की शहादत वास्तव में इस्लाम की सर्वोच्चता और सत्य की स्थिरता की एक स्पष्ट निशानी हैः सयायदा अली फ़ातिमा

मदरसा बिन्तुल हुदा हरियाणा, भारत में शहीद-ए-उम्मत हज़रत आयतुल्लाह अल-उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई (र) की याद में एक प्रभावशाली और आध्यात्मिकता से भरपूर मजलिस-ए-तरहीम और मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन किया गया; जिसमें मदरसे की छात्राओं और सम्मानित महिलाओं की बड़ी संख्या ने भाग लिया और पवित्र क़ुरआन की तिलावत तथा क़ुरआन-ख़्वानी के माध्यम से ईसाले-सवाब पेश किया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मदरसा बिन्तुल हुदा (हरियाणा, भारत) में शहीद-ए-उम्मत हज़रत आयतुल्लाह अल-उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई (रज़वानुल्लाह तआला अलैह) की याद में एक प्रभावशाली और आध्यात्मिकता से भरपूर मजलिस-ए-तरहीम और मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन किया गया; जिसमें मदरसे की छात्राओं और सम्मानित महिलाओं की बड़ी संख्या ने भाग लिया और पवित्र क़ुरआन की तिलावत तथा क़ुरआन-ख़्वानी के माध्यम से ईसाले-सवाब पेश किया।

शहीद-ए-उम्मत की शहादत वास्तव में इस्लाम की सर्वोच्चता और सत्य की स्थिरता की एक स्पष्ट निशानी हैः सयायदा अली फ़ातिमा

मजलिस-ए-अज़ा को संबोधित करते हुए नाज़िमा-ए-तालीम (शिक्षा प्रशासिका) मोहतरमा सैयदा अली फातिमा ने कहा कि शहीद-ए-उम्मत की शहादत वास्तव में इस्लाम की सर्वोच्चता और सत्य की स्थिरता की स्पष्ट निशानी है। उन्होंने अपना पूरा जीवन इस्लाम धर्म की सेवा, मुस्लिम उम्मह के मार्गदर्शन और अत्याचार एवं उद्धतता (इस्तिकबार) के खिलाफ संघर्ष में बिताया। उनकी शहादत हमें यह शिक्षा देती है कि हक़ के मार्ग में बलिदान ही सच्ची सफलता है और यही रास्ता मनुष्य को शाश्वत जीवन प्रदान करता है।

शहीद-ए-उम्मत की शहादत वास्तव में इस्लाम की सर्वोच्चता और सत्य की स्थिरता की एक स्पष्ट निशानी हैः सयायदा अली फ़ातिमा

मदरसे की शिक्षिका मोहतरमा अलक़मा बतूल ने अपने भाषण में कहा कि शहीद क्रांति नेता एक महान स्थान वाली शख्सियत थे, जिन्होंने ज्ञान, परहेज़गारी (तक़्वा) और दूरदर्शिता (बसीरत) के माध्यम से उम्मह का मार्गदर्शन किया। उनका पवित्र जीवन हमारे लिए एक प्रकाश स्तंभ (मशअल-ए-राह) है, और उनका चरित्र हमें हर युग में असत्य के मुकाबले में सत्य का झंडा बुलंद रखने का साहस देता है।

तत्पश्चात, अहले-बैत (अ) की ज़ाकिरा मोहतरमा सैयदा आबिदा बतूल ने मजलिस-ए-अज़ा को संबोधित करते हुए कहा कि शहीद नेता का मार्ग वास्तव में वही मार्ग है जो कर्बला से होकर गुज़रता है। उन्होंने हमेशा मज़लूमों (पीड़ितों) का साथ दिया और ज़ालिम ताकतों के सामने डटकर खड़े रहे।

उन्होंने आगे कहा कि यदि हम कर्बला की घटना को अपने जीवन में व्यावहारिक रूप से अपनाएँ, तो हर अत्याचार के खिलाफ़ आवाज़ उठाना और हक़ का साथ देना हमारा शआर (लक्ष्य) बन जाएगा। यही शहीदों का संदेश है और यही हमारी मुक्ति का मार्ग है।

मजलिस-ए-अज़ा के समापन पर मदरसे की छात्राओं ने शहीद क्रांति नेता की तस्वीर को बुलंद करते हुए जोशीले नारे लगाए और आयतुल्लाह अल-उज़्मा सैयद अली मुज्तबा ख़ामनेई के प्रति अपने अहद (प्रतिज्ञा) को नवीनीकृत किया कि वे उनके नक्श-ए-क़दम (पदचिन्हों) पर चलते हुए इस्लाम धर्म की सर्वोच्चता और सत्य एवं सच्चाई के प्रचार-प्रसार के लिए अपने प्रयास जारी रखेंगी।

शहीद-ए-उम्मत की शहादत वास्तव में इस्लाम की सर्वोच्चता और सत्य की स्थिरता की एक स्पष्ट निशानी हैः सयायदा अली फ़ातिमा

शहीद-ए-उम्मत की शहादत वास्तव में इस्लाम की सर्वोच्चता और सत्य की स्थिरता की एक स्पष्ट निशानी हैः सयायदा अली फ़ातिमा

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